भारत में लोकतंत्र या सत्ता का स्थायीकरण?

October 18, 2026

भारत में लोकतंत्र या सत्ता का स्थायीकरण?

चुनाव होते हैं, सरकार बदलती है, लेकिन क्या वाकई में जनता की सरकार होती है?


1. दो बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों का प्रभुत्व

भारत में मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस दो प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियाँ हैं, जिन्होंने बारी-बारी से देश पर शासन किया है। अन्य छोटे दल भी अधिकांशतः इन्हीं दोनों के रास्ते पर चलते दिखाई देते हैं।

2. सत्ता का असली उद्देश्य

ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकांश राजनीतिक दलों का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा नहीं, बल्कि सत्ता में रहकर देश को लूटना और राज करना बन गया है।

3. नए विकल्पों के लिए कठिन रास्ता

जब भी नई पार्टियाँ आती हैं, तो या तो वे भाजपा और कांग्रेस के नक्शे कदम पर चलने लगती हैं, या उन्हें राजनीतिक, आर्थिक और संस्थागत दबावों के माध्यम से कमजोर कर दिया जाता है।

4. भारत में चीन जैसी व्यवस्था की आशंका

भारत की वर्तमान सत्ता (विशेषकर भाजपा सरकार) ऐसा प्रतीत होती है कि वह लोकतंत्र को नाम मात्र का बनाए रखते हुए, सत्ता में बने रहने के लिए चीन जैसी केंद्रीकृत व्यवस्था की ओर बढ़ना चाहती है।

5. कांग्रेस का अनुभव, भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति

कांग्रेस ने भी लंबे समय तक शासन किया, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि उसने चीन जैसी स्थायी सत्ता व्यवस्था स्थापित करने का गंभीर प्रयास किया, इसलिए वह सत्ता से हट गई। जबकि भाजपा ऐसा प्रतीत होती है कि वह सत्ता से हटने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के लिए आई है।

क्या यह वास्तविक लोकतंत्र है?

यदि जनता की भूमिका केवल वोट देने तक सीमित रह जाए, सरकार जनता के प्रति जवाबदेह न हो, विपक्ष कमजोर हो और नए विकल्पों के लिए रास्ते बंद हों — तो इसे वास्तविक लोकतंत्र कहना मुश्किल है।

वास्तविक लोकतंत्र वह है जिसमें जनता केवल सरकार चुनती ही नहीं, बल्कि सरकार को लगातार जवाबदेह भी बनाती है।


— सोचने और समझने का विषय —