रीवा: बिजली विभाग की 'लेट PD एंट्री' बनी वसूली का हथियार, 10 साल पुराने बिलों के लिए काटे जा रहे वर्तमान परिसर के सभी चालू कनेक्शन
रीवा, 17 मई 2026 | विशेष संवाददाता
रीवा। रीवा शहर और आसपास के इलाकों में मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की वसूली नीति पर गंभीर आरोप लगे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि विभाग अपनी ही लापरवाही से बने बिलों की वसूली के लिए वर्तमान परिसर में लगे सभी चालू बिजली कनेक्शनों को बंधक बना रहा है।
'लेट PD एंट्री' का पूरा खेल क्या है?
पीड़ितों के अनुसार, विभाग का नियम है कि परमानेंट डिस्कनेक्शन (PD) तभी मान्य होगा जब पूरा बकाया जमा हो। उपभोक्ता PD के लिए आवेदन कर देता है, लेकिन विभाग जानबूझकर सिस्टम में PD की एंट्री 4-6 महीने लेट करता है।
इस दौरान सिस्टम में कनेक्शन चालू दिखता है और हर महीने फिक्स्ड चार्ज + लेट फीस जुड़ती रहती है। अब 4-10 साल बाद विभाग उन्हीं बिलों को ब्याज-पेनल्टी के साथ वसूल रहा है, बिना यह देखे कि बिल उसकी अपनी गलती से बना है।
वसूली के 3 गैरकानूनी हथियार
- 1. 2 दिन का अल्टीमेटम: इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में 15 दिन का नोटिस अनिवार्य है, लेकिन विभाग मात्र 2 दिन का समय देकर दबाव बनाता है।
- 2. सभी चालू कनेक्शन कटौती: पुराने PD बिल के लिए वर्तमान परिसर के सभी चालू स्मार्ट मीटर कनेक्शन एक साथ रिमोट से काट दिए जाते हैं। भीषण गर्मी में पूरा परिवार अंधेरे में बैठ जाता है।
- 3. ₹340 का RCDC चार्ज: मजबूरी में किस्त भरने पर भी हर महीने ₹340 का डिसकनेक्शन-रीकनेक्शन चार्ज अलग से जोड़ा जा रहा है।
कानून के खिलाफ कार्रवाई?
इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 56(2) साफ कहती है कि 2 साल से अधिक पुराने बकाए की वसूली नहीं की जा सकती। फिर भी विभाग 4 से 10 साल पुराने बिलों पर RRC कुर्की नोटिस भेज रहा है।
अजगरहा से अनंतपुर तक त्राहि-त्राहि
एक तरफ रीवा से सटा अजगरहा गांव 4 दिन से अंधेरे में है, दूसरी तरफ शहर में PD वाले बिलों का आतंक। शिकायत है कि आउटसोर्स कर्मचारी स्मार्ट मीटर से एक क्लिक में पूरा परिसर बंद कर देते हैं। सामान्य शिकायतों पर सुनवाई न होना दिखाता है कि विभाग को ऊपर से पूरी ढील मिली हुई है।
उपभोक्ताओं की प्रमुख मांगें:
- विभाग की लेट PD एंट्री के कारण बने 4-10 साल पुराने सभी बिल शून्य किए जाएं।
- वर्तमान परिसर के चालू कनेक्शनों की अवैध कटौती तुरंत बंद हो।
- अवैध रूप से वसूले गए RCDC चार्ज वापस हों।
- स्मार्ट मीटर और आउटसोर्स स्टाफ के दुरुपयोग की जांच हो।
यह मामला अब CGRF और कलेक्टर जनसुनवाई तक पहुंच चुका है। उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब गलती विभाग की है, तो सजा जनता क्यों भुगते?
नोट: यह रिपोर्ट पीड़ित उपभोक्ताओं द्वारा दी गई जानकारी एवं शिकायतों के आधार पर तैयार की गई है। म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का पक्ष प्रतीक्षित है।
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